ना वो एक शख्स था….
ना थी कोई शख्सीयत….
ना वो किसी रियासत का वारीस था,
ना किसी की सियासत का मोहरा…
वो कभी दरिया तो कभी जरिया था,
वो मसीहा था इन्साफ की अदालत का…
वो था डुबती यी कश्ती का किनारा,
वो था गरीबो की जिंदगी का सहारा…
वो चिलचिलाती धूप में एक साया था,
वो वंचित की आस बनकर आया था…
वो न सबक था, न था केवल संविधान,
वो था बेजुबाँ के लिये विधी का विधान…
वो सौदागरो की भिड़ से काफी जुदा था,
वो पिछडो-पिडितो के वासते खुदा था…
वो उसूलो की राह पर सदैव चलता रहा…
वो सच्चाई की आग में निरंतर जलता रहा..
-संजय शर्मा, प्रवक्ता, भाजप
शोकाकूल-
सूर्यवंशी परिवार आणि स्नेहीजन


प्रथम पुण्यस्मरण :::*भावपूर्ण आदरांजली*:::